भारत का एल्कोबेव उद्योग 2026 तक मूल्य निर्माण और प्रीमियमकरण की ओर बढ़ रहा है.

ओपिनियन
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CNBC TV18•27-12-2025, 10:19
भारत का एल्कोबेव उद्योग 2026 तक मूल्य निर्माण और प्रीमियमकरण की ओर बढ़ रहा है.
- •भारत का एल्कोबेव बाजार मूल्य संवेदनशीलता से मूल्य निर्माण की ओर बढ़ रहा है, जो युवा, समृद्ध आबादी और 2030 तक US$7 ट्रिलियन के अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद से प्रेरित है.
- •प्रीमियमकरण प्रमुख विकास इंजन है, जिसमें उपभोक्ता प्रामाणिकता, शिल्प कौशल और बेहतर अनुभवों को चुन रहे हैं, जिससे प्रीमियम स्पिरिट्स और कॉकटेल संस्कृति का उदय हो रहा है.
- •युवा उपभोक्ता (Gen-Zs) पसंद की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं, गुणवत्ता, क्यूरेटेड अनुभवों और संयम को प्राथमिकता दे रहे हैं, अक्सर मादक और गैर-मादक पेय के बीच स्विच करते हैं.
- •शिल्प स्पिरिट्स और भारतीय सिंगल माल्ट (Make in India) सहित नवाचार, भारत को एल्कोबेव प्रतिभा और मूल्य निर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है.
- •भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते जैसी नीतिगत स्थिरता विकास के लिए महत्वपूर्ण है, उद्योग का FY26 तक ₹5,30,000 करोड़ (US$ 61.97 बिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत का एल्कोबेव बाजार प्रीमियमकरण, नवाचार और जिम्मेदार खपत की ओर विकसित हो रहा है.
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