As Indian advertising moves into 2026, the opportunity isn’t to reject viralitym it’s to marry it with meaning, forging strategies that resonate not just now, but far beyond the next Reel. (Image source: Unsplash)
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Storyboard07-01-2026, 08:22

भारत के विज्ञापन में बदलाव: 2025 की वायरल सनक, 2026 में अर्थ की वापसी की मांग.

  • 2025 में भारत के विज्ञापन ने पारंपरिक ब्रांड निर्माण और भावनात्मक कहानी कहने के बजाय वायरल होने, अल्पकालिक मेट्रिक्स और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी.
  • ब्रांडों ने पहुंच के लिए प्रभावशाली लोगों और लघु-रूप सामग्री (रील्स इकोनॉमी) पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे अक्सर दीर्घकालिक जुड़ाव और याददाश्त का त्याग हुआ.
  • त्योहारी अभियान, जैसे स्विगी इंस्टामार्ट और ज़ेप्टो के दिवाली विज्ञापन, भावनात्मक गर्मजोशी के बजाय गति, छूट और मीम-योग्य क्षणों पर केंद्रित हो गए.
  • उद्योग के समेकन (जैसे ओमनीकॉम-आईपीजी) और मीडिया गणित के कारण प्रदर्शन मेट्रिक्स ने रचनात्मक नेतृत्व और कहानी कहने की कला को पीछे छोड़ दिया.
  • विशेषज्ञों का सुझाव है कि 2026 में एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी, जिसमें डेटा को रचनात्मकता के साथ एकीकृत किया जाएगा और रचनाकारों को अर्थ के सह-निर्माता के रूप में माना जाएगा.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत के विज्ञापन उद्योग को वायरल होने और मेट्रिक्स को अर्थ और दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण के साथ संतुलित करना होगा.

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