झारखंड के स्वयं सहायता समूह होली के लिए बना रहे हर्बल गुलाल, ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार.

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News18•03-03-2026, 11:15
झारखंड के स्वयं सहायता समूह होली के लिए बना रहे हर्बल गुलाल, ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार.
- •झारखंड के सिमडेगा में सरकारी सहायता प्राप्त स्वयं सहायता समूह (SHG) होली के लिए प्राकृतिक सामग्री से हर्बल गुलाल बना रहे हैं.
- •झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी महिलाएं 'पलाश' ब्रांड के तहत उत्पाद का विपणन कर रही हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है और जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है.
- •हर्बल गुलाल पलाश, हल्दी, चुकंदर और पालक जैसे फूलों और पौधों से रंगों को निकालकर, छाया में सुखाकर बनाया जाता है, इसमें कोई रसायन नहीं होता, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है.
- •JSLPS पिछले 3-4 सालों से सिंथेटिक रंगों से होने वाली एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याओं के कारण हर्बल गुलाल को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें सैकड़ों महिलाओं को पर्यावरण-अनुकूल रंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है.
- •यह उत्पाद कई जिलों में मॉल, अस्थायी स्टालों और खुदरा दुकानों के माध्यम से बेचा जा रहा है, जिसकी कीमत 100 ग्राम के लिए 30-60 रुपये और 250 ग्राम के लिए 90-120 रुपये है, जिससे यह किफायती है.
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