शनिवार को दशरथकृत शनि स्तोत्र: अटके काम और भारी मन का ढाल, जानें विधि और फायदे.

ज्योतिषीय सुझाव
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News18•28-01-2026, 23:06
शनिवार को दशरथकृत शनि स्तोत्र: अटके काम और भारी मन का ढाल, जानें विधि और फायदे.
- •शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है, जो कर्मों के अनुसार फल देने वाले न्याय के देवता हैं.
- •दशरथकृत शनि स्तोत्र एक प्राचीन प्रार्थना है, जिसे राजा दशरथ ने शनि देव को प्रसन्न करने के लिए रचा था.
- •शनिवार की सुबह या शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाकर और चढ़ावा चढ़ाकर स्तोत्र का पाठ करना सबसे उपयुक्त माना जाता है.
- •नियमित पाठ से कार्यों में अनावश्यक देरी कम होती है, मन का बोझ हल्का होता है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और साढ़े साती व ढैया के प्रभाव कम होते हैं.
- •यह स्तोत्र विश्वास, अनुशासन और सही कर्मों पर जोर देता है, क्योंकि शनि देव कर्मों को महत्व देते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: दशरथकृत शनि स्तोत्र जीवन की बाधाओं को दूर करने और शनि देव को प्रसन्न करने का एक मार्ग है.
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