गर्भाधान: वैदिक ज्योतिष के अनुसार इन तिथियों से बचें.

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News18•14-12-2025, 08:15
गर्भाधान: वैदिक ज्योतिष के अनुसार इन तिथियों से बचें.
- •गर्भाधान के लिए वैदिक ज्योतिष 'गर्भ संस्कार' और 'मुहूर्त ज्योतिष' के माध्यम से समय और संरेखण पर जोर देता है.
- •कुछ चंद्र तिथियों जैसे अमावस्या, अष्टमी, चतुर्दशी और रिक्ता तिथियों (चौथी, नौवीं, चौदहवीं) को गर्भाधान के लिए टालने की सलाह दी जाती है.
- •'गंडांत' काल और 'उग्र' नक्षत्रों को संवेदनशील माना जाता है; सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान भी गर्भाधान से बचना चाहिए.
- •शुक्र के वक्री या अस्त होने पर, कई ग्रहों के वक्री होने पर, या चंद्रमा के कमजोर होने पर गर्भाधान के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
- •शनिवार (शनि की भारी ऊर्जा) और मंगलवार (मंगल की आक्रामक ऊर्जा) को गर्भाधान के लिए आमतौर पर टालने वाले दिन माना जाता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यह गर्भावस्था नियोजन के लिए एक पारंपरिक, सचेत दृष्टिकोण प्रदान करता है.
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