Over the last three years, IRDAI has laid out an ambitious modernisation agenda spanning legislation, distribution, capital requirements and digital infrastructure.
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Moneycontrol26-12-2025, 13:53

भारतीय बीमा सुधार अटके: IRDAI के वादे और जमीनी हकीकत में अंतर बढ़ा.

  • 2026 के करीब आते ही भारतीय बीमा क्षेत्र में IRDAI के घोषित सुधारों और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच अंतर बढ़ रहा है.
  • कंपोजिट लाइसेंसिंग और 100% FDI जैसे प्रमुख संरचनात्मक सुधार विधायी बाधाओं और संसदीय कार्रवाई की कमी के कारण रुके हुए हैं.
  • बीमा सुगम (डिजिटल मार्केटप्लेस) और बीमा विस्तार (बंडल्ड पॉलिसी) जैसी डिजिटल पहल शासन, तकनीकी जटिलताओं और उद्योग की तैयारी को लेकर देरी का सामना कर रही हैं.
  • जोखिम-आधारित पूंजी (RBC) का कार्यान्वयन छोटे बीमाकर्ताओं के लिए परिचालन चुनौतियों और संक्रमण की अस्थिरता की चिंताओं के कारण लंबित है.
  • बीमा ASBA, एक IPO-जैसी प्रीमियम व्यवस्था, बैंकों और NPCI के साथ जटिल एकीकरण आवश्यकताओं के कारण अधिकांश बीमाकर्ताओं के लिए विलंबित है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत में प्रमुख बीमा सुधारों में महत्वपूर्ण देरी हो रही है, जो नियामक दृष्टि और जमीनी स्तर पर निष्पादन के बीच अंतर को उजागर करता.

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