FILE PHOTO: FILE PHOTO: A man walks past an installation of the Rupee logo and Indian currency coins outside the Reserve Bank of India (RBI) headquarters in Mumbai, India, April 9, 2025. REUTERS/Francis Mascarenhas/File Photo/File Photo
वित्त
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CNBC TV1806-01-2026, 09:53

RBI ने संबंधित-पक्ष ऋण नियमों को कड़ा किया, नए प्रकटीकरण और सीमाएं तय कीं.

  • RBI ने बैंकों, NBFCs, सहकारी बैंकों और AIFIs के लिए संबंधित-पक्ष ऋण पर संशोधित निर्देश जारी किए, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे, ताकि शासन और पारदर्शिता बढ़े.
  • नए नियम इक्विटी निवेश को बाहर करते हैं लेकिन ऋण उपकरणों को कवर करते हैं; कुछ NBFCs और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों को छूट दी गई है.
  • मौजूदा गैर-अनुपालक लेनदेन नवीनीकरण/संशोधन तक जारी रह सकते हैं लेकिन गैर-अनुपालक होने पर नवीनीकृत नहीं किए जा सकते; संबंधित-पक्ष अनुबंधों के लिए सख्त प्रकटीकरण अनिवार्य है.
  • संबंधित पक्षों की विस्तारित परिभाषा कंपनी अधिनियम और IBC के अनुरूप है, जिसमें प्रमोटर, निदेशक, KMP और 10%+ शेयरधारक शामिल हैं.
  • बैंकों (परिसंपत्ति-आधारित) और NBFCs (परत-आधारित) के लिए भौतिकता सीमाएं पेश की गईं; पूरी तरह से सुरक्षित ऋण (LTV <= 100%) बोर्ड अनुमोदन से मुक्त हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: RBI के नए नियम संबंधित-पक्ष ऋण को कड़ा करते हैं, वित्तीय संस्थाओं में पारदर्शिता और शासन बढ़ाते हैं.

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