सिद्धारमैया: हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, कन्नड़ और कन्नडिगाओं के अधिकारों के लिए उठाएंगे आवाज.

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News18•29-12-2025, 15:55
सिद्धारमैया: हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं, कन्नड़ और कन्नडिगाओं के अधिकारों के लिए उठाएंगे आवाज.
- •कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है और उनकी सरकार कन्नड़ तथा कन्नडिगाओं के अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी रहेगी.
- •सिद्धारमैया ने बताया कि कर्नाटक हर साल लगभग ₹4.5 लाख करोड़ का कर देता है, लेकिन केंद्र से प्रति रुपये केवल 14 पैसे वापस मिलते हैं.
- •उन्होंने कहा कि कर्नाटक प्रति व्यक्ति आय में देश में नंबर एक पर है, जो राज्य सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों से हासिल हुआ है.
- •मुख्यमंत्री ने कन्नड़ को एक संप्रभु भाषा बताया और 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का उल्लेख किया; उन्होंने 1973 में राज्य का नाम कर्नाटक रखने का भी जिक्र किया.
- •सिद्धारमैया ने कन्नड़ भाषा, भूमि, जल, सीमाओं और कन्नडिगाओं के रोजगार से संबंधित मामलों पर कोई समझौता न करने का संकल्प लिया और केंद्र के "सौतेले व्यवहार" की निंदा करने का आह्वान किया.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सिद्धारमैया ने हिंदी को राष्ट्रभाषा मानने से इनकार किया, कन्नड़ और राज्य के अधिकारों के लिए दृढ़ समर्थन का वादा किया.
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