सूर्यकुमार को 2003 के सचिन तेंदुलकर जैसी मानसिकता अपनानी होगी, तभी चेन्नई में सफलता मिलेगी और ड्रेसिंग रूम को भयमुक्त रखना होगा.
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सूर्यकुमार को 2003 के तेंदुलकर की तरह सोचना होगा, तभी चेन्नई में होगा बेड़ा पार.
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News18•26-02-2026, 17:50
सूर्यकुमार को 2003 के तेंदुलकर की तरह सोचना होगा, तभी चेन्नई में होगा बेड़ा पार.
•हालिया हार के बाद भारत पर भारी दबाव और सोशल मीडिया की आलोचना है, टीम को 'खराब रात' से उबरने के लिए मानसिक मजबूती की जरूरत है.
•मिसफील्ड, नो-बॉल और सामूहिक बल्लेबाजी विफलता ने हार में योगदान दिया, जिससे एकजुट टीम प्रदर्शन की आवश्यकता पर जोर दिया गया.
•सूर्यकुमार यादव से 2003 विश्व कप में सचिन तेंदुलकर के नेतृत्व की नकल करने का आग्रह किया गया है ताकि टीम को इस 'करो या मरो' की स्थिति से निकाला जा सके.
•ड्रेसिंग रूम को डर से बचना चाहिए और एकता बनाए रखनी चाहिए, गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव को कोच और कप्तान के रूप में आगे आना होगा.
•टीम को आगामी महत्वपूर्ण मैचों के लिए एडिलेड में ऐतिहासिक वापसी के समान, फिर से संगठित होने और वापसी का रास्ता खोजने की जरूरत है.