
बढ़ती तेल कीमतें मुद्रास्फीति बढ़ाएँगी और भारतीय उपभोक्ताओं के लिए रोज़मर्रा की चीज़ों को महंगा कर देंगी।
वैश्विक तेल संकट के बीच, आरबीआई अपनी आगामी मौद्रिक नीति में मुद्रास्फीति की चिंताओं और विकास की गति के बीच संतुलन बनाते हुए एक नपा-तुला रुख अपना सकता है।
बढ़ती ब्याज दरें अर्थव्यवस्था को धीमा कर देंगी और निवेश के मूल्य को कम कर देंगी। उच्च दरें आमतौर पर सोने का आकर्षण भी कम करती हैं।