
आरबीआई की एनओपी-आईएनआर सीमा का लक्ष्य रुपये की अस्थिरता पर अंकुश लगाना है, लेकिन आर्थिक स्थिरता पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का विवरण दिए गए स्रोतों में नहीं दिया गया है।
दिए गए स्रोतों में भारतीय बैंकों द्वारा डॉलर की जबरन बिक्री का स्पष्ट रूप से ब्यौरा नहीं दिया गया है।
हाँ, वैश्विक कारक रुपये की बढ़त को उलट सकते हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारक हैं। यदि ये दबाव बने रहते हैं, तो रुपया प्रति डॉलर 95 तक कमजोर हो सकता है।