अंकों से परे: भारतीय स्कूलों में काउंसलिंग को क्यों बनना चाहिए मुख्य बुनियादी ढांचा.

शिक्षा और करियर
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News18•16-02-2026, 14:48
अंकों से परे: भारतीय स्कूलों में काउंसलिंग को क्यों बनना चाहिए मुख्य बुनियादी ढांचा.
- •भारतीय शिक्षा में बदलाव आ रहा है, अब छात्रों की सफलता केवल अंकों पर नहीं, बल्कि स्पष्ट दिशा, भावनात्मक लचीलेपन और सूचित निर्णय लेने की क्षमता पर निर्भर करती है.
- •पारंपरिक रूप से पूरक मानी जाने वाली काउंसलिंग को अब छात्रों के जटिल माहौल और तेजी से बदलते करियर परिदृश्य के कारण सीखने की यात्रा का एक सतत और एकीकृत हिस्सा बनना चाहिए.
- •IC3 इंस्टीट्यूट की स्टूडेंट क्वेस्ट रिपोर्ट बताती है कि छात्र करियर विकल्पों को बहुत पहले तलाश रहे हैं और डिजिटल उपकरणों पर निर्भर हैं, लेकिन जानकारी की उपलब्धता से हमेशा स्पष्टता नहीं आती.
- •संरचित मार्गदर्शन से छात्र-अभिभावक संचार, आत्मविश्वास और कल्याण में सुधार होता है; सीबीएसई का समर्पित काउंसलर अनिवार्य करना इस आवश्यकता को दर्शाता है.
- •काउंसलिंग छात्रों को उनकी रुचियों और प्रेरणाओं को समझने में मदद करती है, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ निर्णय ले पाते हैं और परिवार में रचनात्मक चर्चाएँ होती हैं, यह केवल करियर विकल्प सुझाने से कहीं बढ़कर है.
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