धर्मेंद्र प्रधान: JNU की आत्मा है आलोचनात्मक सोच, 9वें दीक्षांत समारोह में बोले

शिक्षा और करियर
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News18•12-01-2026, 18:37
धर्मेंद्र प्रधान: JNU की आत्मा है आलोचनात्मक सोच, 9वें दीक्षांत समारोह में बोले
- •केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की उपस्थिति में JNU के 9वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया.
- •प्रधान ने स्नातकों को बधाई दी और उच्च शिक्षा में JNU के योगदान और शैक्षणिक उत्कृष्टता की सराहना की.
- •उन्होंने JNU की शैक्षणिक स्वायत्तता और आलोचनात्मक सोच की परंपरा को इसकी संस्कृति का मूल बताया.
- •मंत्री ने छात्रों से समावेशिता, सामाजिक न्याय और जिम्मेदारी के JNU के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया.
- •प्रधान ने स्नातकों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: धर्मेंद्र प्रधान ने JNU की आत्मा के रूप में आलोचनात्मक सोच पर जोर दिया और स्नातकों से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आग्रह किया.
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