यूजीसी के नए समानता नियम पर देशव्यापी विवाद, राजनीतिक बहस तेज.

शिक्षा और करियर
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News18•26-01-2026, 14:33
यूजीसी के नए समानता नियम पर देशव्यापी विवाद, राजनीतिक बहस तेज.
- •यूजीसी के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता संवर्धन विनियम, 2026, जो 15 जनवरी, 2026 को अधिसूचित किए गए, का उद्देश्य जाति-आधारित भेदभाव को रोकना और समावेशी शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना है.
- •ये नियम औपचारिक रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में शामिल करते हैं, जिससे उन्हें शिकायत दर्ज करने का अधिकार मिलता है, जो एससी/एसटी पर केंद्रित पिछली व्यवस्थाओं से एक महत्वपूर्ण बदलाव है.
- •अनिवार्य संरचनात्मक परिवर्तनों में समान अवसर प्रकोष्ठों और विश्वविद्यालय-स्तरीय समानता समितियों की स्थापना शामिल है, जिनमें ओबीसी, महिलाएं, एससी, एसटी और विकलांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व होगा, जो हर छह महीने में यूजीसी को रिपोर्ट करेंगे.
- •जयपुर में सवर्ण समाज समन्वय समिति (एस-4) सहित उच्च जाति के संगठनों ने इन प्रावधानों का विरोध किया है, उनका तर्क है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है और झूठी शिकायतें दर्ज हो सकती हैं.
- •यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है, खासकर 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, और ऑनलाइन भी तेज हो गया है, जहां कुछ प्रभावशाली लोगों ने इसे "उच्च जाति विरोधी" बताया है, जबकि समर्थक इसे एक आवश्यक सुधार मानते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से यूजीसी के नए समानता नियमों ने व्यापक विवाद और राजनीतिक बहस छेड़ दी है.
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