युद्धपोतों से कर्तव्य पथ तक: गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी का महत्व और इतिहास

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News18•26-01-2026, 10:36
युद्धपोतों से कर्तव्य पथ तक: गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी का महत्व और इतिहास
- •21 तोपों की सलामी गणतंत्र दिवस पर एक औपचारिक अनुष्ठान है, जो ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ संविधान और संप्रभुता के प्रति सम्मान का प्रतीक है.
- •इसकी उत्पत्ति 14वीं सदी के नौसैनिक रीति-रिवाजों से हुई, जहाँ युद्धपोत शांतिपूर्ण इरादे दिखाने के लिए तोपें दागते थे; 21 तोपों की सलामी सर्वोच्च सम्मान का अंतरराष्ट्रीय मानक बन गई.
- •भारत ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान इस परंपरा को अपनाया; स्वतंत्रता के बाद, यह गणतंत्र और राष्ट्रपति के प्रति सम्मान का प्रतीक है.
- •गणतंत्र दिवस पर, राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर झंडा फहराते हैं, जिसके बाद राष्ट्रगान के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाती है.
- •भारत ने ब्रिटिश-युग की 25-पाउंडर तोपों से स्वदेशी 105 मिमी इंडियन फील्ड गन में बदलाव किया है, जो 'मेक-इन-इंडिया' पहल के अनुरूप है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी, नौसैनिक उत्पत्ति वाली एक परंपरा, अब भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.
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