न्यायमूर्ति विक्रम नाथ: AI अदालतों की सहायता कर सकता है, पर मानवीय निर्णय का स्थान नहीं ले सकता.
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AI अदालतों की मदद कर सकता है, मानवीय निर्णय की जगह नहीं ले सकता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ.
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News18•23-03-2026, 10:58
AI अदालतों की मदद कर सकता है, मानवीय निर्णय की जगह नहीं ले सकता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ.
•न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि AI न्यायिक प्रणाली को बढ़ा सकता है लेकिन निर्णय देने में न्यायाधीशों की जगह नहीं ले सकता.
•उन्होंने जोर दिया कि मामलों का फैसला करने और निर्णय लिखने की मुख्य जिम्मेदारी न्यायाधीशों के पास ही रहनी चाहिए.
•AI वैवाहिक विवादों, वाणिज्यिक समझौतों या संवैधानिक/आपराधिक मुद्दों जैसे मामलों की जटिलता को संभाल नहीं सकता क्योंकि इसमें निश्चित डेटासेट और मानवीय बारीकियों की कमी होती है.
•न्यायमूर्ति ए जी मसीह और वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवैया ने भी चिंता व्यक्त की, यह उजागर करते हुए कि AI में मानवीय विवेक की कमी है और यह गलतियाँ (भ्रम) उत्पन्न कर सकता है.
•दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय ने विश्व स्तर पर न्यायिक शासन में AI के बढ़ते एकीकरण पर ध्यान दिया, लेकिन हेरफेर किए गए डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक परीक्षणों की आवश्यकता के बारे में चेतावनी दी.