As per the conditions of approval, the states/UTs concerned have to ensure that a minimum number of trees are felled, and wherever feasible, translocation of trees is to be done, and the permission for felling of trees is given by the concerned states/UTs. Representational image
भारत
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News1806-02-2026, 00:56

2020 से अब तक सड़कों, खनन, जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भारत ने गंवाई 1 लाख हेक्टेयर वन भूमि.

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 तक भारत में लगभग 97,050 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया.
  • मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वन भूमि (24,346 हेक्टेयर) डायवर्ट की गई, इसके बाद ओडिशा (12,875 हेक्टेयर) और गुजरात (6,850 हेक्टेयर) का स्थान रहा.
  • सड़क निर्माण के लिए सर्वाधिक वन भूमि (22,233 हेक्टेयर) का उपयोग किया गया, इसके बाद खनन (18,913 हेक्टेयर) और जलविद्युत/सिंचाई परियोजनाओं (17,434 हेक्टेयर) का नंबर आता है.
  • इस अवधि के दौरान सरकार ने 10,026 प्रस्तावों को मंजूरी दी और केवल 120 को अस्वीकृत किया, जो अत्यधिक उच्च अनुमोदन दर को दर्शाता है.
  • पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरणीय मंजूरी प्रस्तावों के तेजी से प्रसंस्करण का श्रेय नियामक सुधारों, प्रौद्योगिकी और एकल-खिड़की प्रणाली को दिया है.

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