India’s condolence diplomacy signals support for democratic stability in Bangladesh
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Firstpost01-01-2026, 19:25

भारत की कूटनीतिक चाल: बांग्लादेश में यूनुस-जमात धुरी को अलग-थलग कर रहा है.

  • भारत बांग्लादेश में सावधानीपूर्वक कूटनीतिक कदम उठा रहा है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक ताकतों का समर्थन करना और यूनुस-जमात धुरी पर सवाल उठाना है.
  • खालिदा जिया के निधन के बाद, पीएम मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीएनपी नेतृत्व, जिसमें तारिक रहमान भी शामिल हैं, से संपर्क साधा, जो एक दुर्लभ स्पष्ट पहुंच है.
  • ये कदम मुहम्मद यूनुस की राजनीतिक दिशा और जमात-ए-इस्लामी के साथ उनकी कथित निकटता पर परोक्ष रूप से सवाल उठाते हैं, जिसका प्रतिबंध उनके प्रभाव में हटा दिया गया है.
  • नई दिल्ली को डर है कि बांग्लादेश अपनी धर्मनिरपेक्ष, भाषाई पहचान (1971 की भावना) खो सकता है और कट्टरपंथी पारिस्थितिकी तंत्र के समेकन के कारण "बंगाली पाकिस्तान" बन सकता है.
  • भारत का लक्ष्य एक लोकतांत्रिक गठबंधन बनाना, वैचारिक अस्थिरता को रोकना और जिम्मेदार शासन सुनिश्चित करना है, जैसा कि बांग्लादेशी सेना प्रमुख के साथ सुरक्षा वार्ता में देखा गया.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत "शोक कूटनीति" का उपयोग कर बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान को बचाने का प्रयास कर रहा है.

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