कर्नाटक राज्यपाल ने भाषण अधूरा छोड़ा: आधिकारिक भाषणों पर संवैधानिक संकट गहराया

भारत
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News18•22-01-2026, 15:59
कर्नाटक राज्यपाल ने भाषण अधूरा छोड़ा: आधिकारिक भाषणों पर संवैधानिक संकट गहराया
- •कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य विधानमंडल में अपना संबोधन अचानक समाप्त कर दिया, उन्होंने सिद्धारमैया सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया.
- •राज्यपाल ने भाषण के उन हिस्सों पर आपत्ति जताई जिनमें केंद्र सरकार की नीतियों, जैसे MGNREGA को रद्द करने और नए VB-GRAMG कानून की आलोचना की गई थी, उन्हें "झूठा या भ्रामक" बताया.
- •तमिलनाडु और केरल में भी ऐसी ही घटनाएं हुई हैं, जहां राज्यपालों ने राज्य सरकारों द्वारा तैयार भाषणों के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया या बदल दिया, जो विपक्षी शासित राज्यों में एक बढ़ते पैटर्न को उजागर करता है.
- •संविधान का अनुच्छेद 176(1) राज्यपाल को राज्य सरकार द्वारा तैयार भाषण के साथ विधानमंडल को संबोधित करने का आदेश देता है, जो उसकी नीतियों को दर्शाता है.
- •राज्य सरकारें राज्यपाल के इनकार को अदालत में चुनौती दे सकती हैं, संवैधानिक संशोधनों के लिए दबाव डाल सकती हैं, प्रस्ताव पारित कर सकती हैं या ऐसे संघर्षों को संबोधित करने के लिए राजनीतिक दबाव डाल सकती हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: राज्यपालों द्वारा राज्य-तैयार भाषण पढ़ने से इनकार करने से संघीय संतुलन और राज्यपाल की शक्तियों पर संवैधानिक बहस छिड़ गई है.
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