
यह अनिश्चित है कि चुनाव के बाद चाय जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा मिलेगा या नहीं, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस मुद्दे पर वादे किए हैं।
चुनाव परिणाम का चाय बागान श्रमिकों पर असर कल्याणकारी सुधारों, वेतन वृद्धि, भूमि अधिकारों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे के वादों पर निर्भर करता है।
चाय जनजाति के कल्याण के लिए दीर्घकालिक समाधान स्पष्ट रूप से विस्तृत नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक दल अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने, मजदूरी बढ़ाने और भूमि अधिकार प्रदान करने जैसे वादों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।