शेख हसीना: 'मौत से नहीं, लोकतंत्र से डर है' - बांग्लादेश संकट पर विशेष इंटरव्यू.

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CNBC Awaaz•18-12-2025, 12:51
शेख हसीना: 'मौत से नहीं, लोकतंत्र से डर है' - बांग्लादेश संकट पर विशेष इंटरव्यू.
- •शेख हसीना ने अपनी मौत की सज़ा को एक "राजनीतिक हत्या" बताया, जिसे एक "कंगारू कोर्ट" ने सुनाया है, जो एक गैर-निर्वाचित अंतरिम सरकार के इशारे पर काम कर रहा है.
- •वह अवामी लीग पर प्रतिबंध को अंतरिम सरकार के वास्तविक लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा के डर का प्रमाण मानती हैं.
- •हसीना ने डॉ. यूनुस की पाकिस्तान और ISI गतिविधियों से बढ़ती निकटता की आलोचना की, वर्तमान घटनाओं को 1971 के अत्याचारों से जोड़ा.
- •उनका मानना है कि भारत-बांग्लादेश संबंध अस्थायी रूप से तनावपूर्ण हैं और निष्पक्ष चुनावों और एक प्रतिनिधि नेतृत्व के साथ सुधरेंगे.
- •हसीना ने प्रत्यर्पण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि उनका न्याय बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली पर निर्भर करता है, न कि नई दिल्ली के फैसले पर.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: शेख हसीना बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए चिंतित हैं, अपनी जान के लिए नहीं, राजनीतिक उथल-पुथल और पार्टी प्रतिबंध के बीच.
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