एनजीएमए दिल्ली में सतीश गुजराल की कला यात्रा: विभाजन चित्रों से नव-तांत्रिक कला तक
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सतीश गुजराल रेट्रोस्पेक्टिव: विभाजन के दर्द से नव-तांत्रिक कला तक का सफर
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Moneycontrol•24-02-2026, 16:06
सतीश गुजराल रेट्रोस्पेक्टिव: विभाजन के दर्द से नव-तांत्रिक कला तक का सफर
•एनजीएमए दिल्ली में सतीश गुजराल की एक बड़ी रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी आयोजित की गई है, जिसमें उनके 60 से अधिक वर्षों के विविध करियर को दर्शाया गया है।
•प्रदर्शनी में 1947 के विभाजन पर उनके शुरुआती काम शामिल हैं, जो व्यक्तिगत दुख और पीड़ा को दर्शाते हैं।
•डिएगो रिवेरा और फ्रीडा काहलो के साथ मेक्सिको में गुजराल के समय ने उनकी कलात्मक यात्रा को प्रभावित किया, जिससे सामग्री और अमूर्तता के साथ प्रयोग हुए।
•उन्होंने भारत में भित्तिचित्र कला में क्रांति ला दी, स्मारकीय सार्वजनिक कार्य बनाए और नई दिल्ली में प्रतिष्ठित बेल्जियम दूतावास को डिजाइन किया।
•रेट्रोस्पेक्टिव गुजराल के मानवतावादी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है, जिसमें आलंकारिक से अमूर्त तक की शैलियों को अपनाया गया है, और पॉप संस्कृति व तंत्र दर्शन को शामिल किया गया है।