महिलाओं में कैंसर: सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, एक सामाजिक लड़ाई भी

जीवनशैली
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News18•04-02-2026, 14:07
महिलाओं में कैंसर: सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, एक सामाजिक लड़ाई भी
- •महिलाओं के लिए, कैंसर का निदान केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं है, यह घरों, कार्यस्थलों, रिश्तों और पहचान को प्रभावित करता है, जिससे गहरी सामाजिक असमानताएं उजागर होती हैं.
- •डॉ. गीता कदायाप्रथ बताती हैं कि भारतीय महिलाओं को कैंसर का असमान बोझ उठाना पड़ता है, खासकर स्तन और स्त्री रोग संबंधी कैंसर का, जिसमें सामाजिक वास्तविकताएं देखभाल में देरी करती हैं.
- •कई महिलाएं पारिवारिक आवश्यकताओं, घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के कारण जांच को टाल देती हैं, जिससे देर से पता चलता है जो स्तन और सर्वाइकल कैंसर जैसे कैंसर के लिए घातक हो सकता है.
- •सामाजिक कलंक, परित्याग का डर और आर्थिक निर्भरता समस्या को और बढ़ा देती है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा निवेश अक्सर पुरुषों को प्राथमिकता दी जाती है.
- •महिलाओं में कैंसर से निपटने के लिए सामाजिक बदलाव की आवश्यकता है, जिसमें परामर्श, उत्तरजीविता योजना को एकीकृत करना और महिलाओं को बिना किसी अपराधबोध के अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए सशक्त बनाना शामिल है.
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