होम्योपैथी अब 'वैकल्पिक' नहीं: 2025 तक भारत में एकीकृत स्वास्थ्य सेवा का अभिन्न अंग.

जीवनशैली
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News18•04-01-2026, 11:19
होम्योपैथी अब 'वैकल्पिक' नहीं: 2025 तक भारत में एकीकृत स्वास्थ्य सेवा का अभिन्न अंग.
- •2025 तक, भारत में होम्योपैथी 'वैकल्पिक' से हटकर एकीकृत स्वास्थ्य सेवा मॉडल का एक अभिन्न अंग बन गई है, जो पारंपरिक चिकित्सा को पूरक उपचारों के साथ जोड़ती है.
- •भारतीय होम्योपैथी बाजार, 2023 में ₹5,892 करोड़ का था, जिसके 2035 तक ₹17,681 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो उपभोक्ता विश्वास और निवेश से प्रेरित है.
- •भारत में होम्योपैथी की गहरी जनसांख्यिकीय पैठ है, लगभग 10% परिवार इसका उपयोग करते हैं और 3 लाख से अधिक पंजीकृत चिकित्सक पहुंच सुनिश्चित करते हैं.
- •आयुष मंत्रालय के माध्यम से सरकारी समर्थन संरचित शिक्षा, अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर प्रदान करता है, जो समग्र देखभाल की ओर नीतिगत बदलाव को दर्शाता है.
- •दीर्घकालिक कल्याण और व्यक्तिगत देखभाल के लिए बढ़ती रोगी अपेक्षाएं, साथ ही चल रही नियामक चर्चाएं, होम्योपैथी की भूमिका को देखभाल के एक पूरक स्तंभ के रूप में मजबूत करती हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: होम्योपैथी अब भारत की एकीकृत स्वास्थ्य सेवा का अभिन्न अंग है, जो बाजार वृद्धि और नीति से प्रेरित है.
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