मोतीचूर लड्डू: गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस समारोह का मीठा प्रतीक

जीवनशैली
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Moneycontrol•25-01-2026, 10:01
मोतीचूर लड्डू: गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस समारोह का मीठा प्रतीक
- •मोतीचूर लड्डू पूरे भारत में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक अभिन्न अंग है, खासकर स्कूलों और कॉलेजों में.
- •राष्ट्रीय समारोहों के दौरान मिठाइयों, विशेषकर लड्डूओं के वितरण की परंपरा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में निहित है, जो खुशी और आशा का प्रतीक है.
- •कहानियों से पता चलता है कि 15 अगस्त, 1947 को जवाहरलाल नेहरू के "ट्रिस्ट विद डेस्टिनी" भाषण के बाद मोतीचूर लड्डू बांटे गए थे, जिससे स्वतंत्रता के साथ उनका जुड़ाव मजबूत हुआ.
- •ऐतिहासिक रूप से, लड्डू वितरण के लिए व्यावहारिक थे: बांटने में आसान, रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता नहीं, कम गन्दा और बड़ी सभाओं के लिए लागत प्रभावी.
- •17वीं सदी के राजस्थान के शाही रसोईघरों में उत्पन्न हुए मोतीचूर लड्डू एक शुभ त्योहार की मिठाई से एकता और गौरव के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में विकसित हुए.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मोतीचूर लड्डू सिर्फ एक मिठाई से बढ़कर है, यह भारत के राष्ट्रीय गौरव, एकता और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतीक है.
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