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जीवनशैली
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Firstpost04-02-2026, 16:11

ओरल कैंसर: बदलते जोखिम, देर से निदान और शीघ्र जांच की तत्काल आवश्यकता.

  • भारत में 90% से अधिक ओरल कैंसर के मामले तंबाकू से जुड़े हैं, जो सांस्कृतिक सामान्यीकरण के कारण पुरुषों में अधिक प्रचलित है.
  • चिकित्सक अब तंबाकू का सेवन न करने वाली महिलाओं और युवा रोगियों में भी ओरल कैंसर देख रहे हैं, जिसमें HPV एक योगदान कारक के रूप में पहचाना गया है.
  • दृश्यमान होने के बावजूद, भारत में ओरल कैंसर का निदान अक्सर देर से होता है, जिससे उपचार अधिक आक्रामक और कम प्रभावी हो जाता है.
  • डॉ. सुल्तान ए. प्रधान के अनुसार, स्क्रीनिंग कार्यक्रम पूर्व-कैंसर स्थितियों का शीघ्र पता लगाकर मृत्यु दर को 24-30% तक कम कर सकते हैं.
  • डॉ. श्याम अग्रवाल के अनुसार, आणविक निदान में प्रगति, जिसमें डीप डीएनए सीक्वेंसिंग और सर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए शामिल हैं, शीघ्र पता लगाने का वादा करती है.

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