रिया चोपड़ा की 'नेवर लॉग्ड आउट': इंटरनेट के प्रभाव पर चिंतन
जीवनशैली
F
Firstpost22-01-2026, 17:44

रिया चोपड़ा की 'नेवर लॉग्ड आउट': इंटरनेट के प्रभाव पर चिंतन

  • लेखिका रिया चोपड़ा की पहली किताब 'नेवर लॉग्ड आउट' इंटरनेट के व्यक्तियों पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव की पड़ताल करती है, जिसमें डिजिटल जीवन को समझने पर जोर दिया गया है.
  • किताब लिखने के दौरान चोपड़ा ने अपने इंटरनेट उपयोग के साथ सीमाएं निर्धारित कीं, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ उनके संबंध में मौलिक बदलाव आया और उनका स्क्रीन टाइम कम हुआ.
  • किताब की संरचना इंटरनेट की खपत को दर्शाती है, जिसमें आपस में जुड़े निबंध, विषयांतर और घने उद्धरण शामिल हैं, जो पाठकों को गहराई से जुड़ने और आगे तलाशने के लिए आमंत्रित करते हैं.
  • चोपड़ा इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि 'लॉग ऑफ' करने की क्षमता एक विशेषाधिकार है, खासकर भारत में जहां इंटरनेट काम और आकांक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे असमान जुड़ाव होता है.
  • वह तर्क देती हैं कि डिजिटल बर्नआउट केवल मानसिक नहीं बल्कि शारीरिक भी है, जो शरीर को प्रभावित करता है, और इंटरनेट द्वारा अनचाहे परिवर्तन और तकनीकी दिग्गजों की अनियंत्रित शक्ति पर चिंता व्यक्त करती हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रिया चोपड़ा की 'नेवर लॉग्ड आउट' इंटरनेट की परिवर्तनकारी शक्ति और डिजिटल सीमाओं की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर प्रकाश डालती है.

More like this

Loading more articles...