
अशोक खरात ने कथित तौर पर 10-12 सालों में ₹1500 करोड़ की संपत्ति जमा की। इस विशाल साम्राज्य की जांच नासिक साइबर विभाग द्वारा NATGRID एप्लिकेशन का उपयोग करके की जा रही है।
अशोक खरात के साथ उनके कथित संबंध के कारण रूपाली चक्रांकर का पद जांच के दायरे में है।
यह मामला क्रेडिट सोसायटियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे ऋण प्रदान करने की उनकी क्षमता और उनकी वित्तीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है, जैसा कि ऋण माफी और सहकारी बैंकों को मजबूत करने संबंधी चर्चाओं में देखा गया है।