
ईरान पर ट्रंप का रुख तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि का कारण बन सकता है, जो संभावित रूप से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास प्रभावित होगा।
भारतीय बाजार पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण काफी अस्थिरता का सामना कर रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की निकासी हो रही है।
हाँ, निवेशकों को भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण रणनीतियों को समायोजित करना चाहिए।