मुर्गी बीट खाद से खेती को मिली 'संजीवनी', छत्तीसगढ़ में बढ़ा उत्पादन.

कृषि
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News18•08-01-2026, 00:30
मुर्गी बीट खाद से खेती को मिली 'संजीवनी', छत्तीसगढ़ में बढ़ा उत्पादन.
- •मुर्गी पालन और खेती को जोड़कर एक लाभदायक मॉडल बनाया जा रहा है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो रही है.
- •अनुभवी किसान घनश्याम रात्रे के अनुसार, मुर्गी बीट से बनी खाद रासायनिक उर्वरकों से अधिक प्रभावी है और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारती है.
- •यह जैविक खाद मिट्टी को भुरभुरी बनाती है, केंचुओं की संख्या बढ़ाती है और सभी प्रकार की खेती में उपयोग की जा सकती है.
- •छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत की चुनौती का समाधान मुर्गी बीट खाद से मिल रहा है.
- •3000 मुर्गियों से चार ट्रॉली खाद मिलती है, जो चार एकड़ जमीन के लिए पर्याप्त है और प्रति एकड़ 30 क्विंटल तक उत्पादन बढ़ा सकती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मुर्गी बीट खाद खेती के लिए एक टिकाऊ और लाभदायक समाधान है, जो उत्पादन और मिट्टी का स्वास्थ्य बढ़ाती है.
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