
रांची के किसान दिवाकर ने पारंपरिक धान के बजाय चना और सरसों के बीज उगाना शुरू किया। उन्होंने 'सीड एग्रोटेक रांची' से आधुनिक बीज उत्पादन तकनीकें सीखीं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बीज उत्पादन से होने वाली कमाई से पूरा हुआ विशिष्ट बचपन का सपना उल्लिखित नहीं है। हालांकि, एक स्रोत बताता है कि बचपन का एक शौक आय का स्रोत बन गया है।
किसान दिवाकर की 'ब्रह्मास्त्र खाद' रसोई के कचरे से बनी है, जिसमें अंडे के छिलके, इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती, आलू के छिलके, प्याज के छिलके और राख शामिल हैं।