बाघों की जनगणना: पगमार्क की जगह अब आधुनिक तकनीक से होती है सटीक गिनती

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News18•21-01-2026, 19:58
बाघों की जनगणना: पगमार्क की जगह अब आधुनिक तकनीक से होती है सटीक गिनती
- •भारत में हर चार साल में NTCA और WII द्वारा अखिल भारतीय बाघ अनुमान किया जाता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण है.
- •पुराना पगमार्क तरीका (1970-2000) गलत साबित हुआ और 2005 के बाद बंद कर दिया गया, क्योंकि इससे कई बार गिनती और बाघों के गायब होने की समस्या थी.
- •आधुनिक प्रक्रिया में तीन चरण शामिल हैं: फील्ड डेटा संग्रह (फुट सर्वे, M-STrIPES ऐप), लैंडस्केप मैपिंग (रिमोट सेंसिंग), और गहन कैमरा ट्रैपिंग.
- •तीसरे चरण, कैमरा ट्रैपिंग में, हजारों मोशन-सेंसिटिव कैमरों का उपयोग करके अद्वितीय धारी पैटर्न कैप्चर किए जाते हैं, जिससे जनसंख्या अनुमान के लिए व्यक्तिगत आईडी बनती हैं.
- •2022 की जनगणना में औसतन 3,682 बाघों का अनुमान लगाया गया, जिसमें 6% वार्षिक वृद्धि देखी गई, मध्य प्रदेश में सबसे अधिक संख्या (785) थी.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: आधुनिक तकनीक और तीन-चरणों वाली प्रक्रिया पुरानी विधियों की जगह बाघों की आबादी का सटीक अनुमान सुनिश्चित करती है.
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