आंध्र प्रदेश की चीनी मिलें दिवालियापन की कगार पर: राजनीतिक उपेक्षा और भ्रष्टाचार जिम्मेदार

विशाखापत्तनम
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News18•05-02-2026, 06:46
आंध्र प्रदेश की चीनी मिलें दिवालियापन की कगार पर: राजनीतिक उपेक्षा और भ्रष्टाचार जिम्मेदार
- •आंध्र प्रदेश, विशेषकर अनाकापल्ली जिले में चीनी मिलों की स्थिति बेहद खराब है और दशकों की राजनीतिक उपेक्षा व भ्रष्टाचार के कारण दिवालियापन की ओर बढ़ रही हैं.
- •कभी फलता-फूलता सहकारी क्षेत्र, जिसमें अनाकापल्ली (तुम्मापाला), तांडव और एतिकोप्पाका जैसी मिलें शामिल थीं, अब राजनीतिक हस्तक्षेप और कुप्रबंधन से पंगु हो गया है.
- •1959 में किसानों के निवेश से बचाई गई तुम्मापाला चीनी मिल अपनी जर्मन तकनीक और संलग्न डिस्टिलरी के लिए अद्वितीय थी, जो रोजगार प्रदान करती थी और चिकित्सा उपयोग के लिए स्पिरिट का उत्पादन करती थी.
- •राजनीतिक प्रभुत्व बढ़ने से धन का दुरुपयोग हुआ, आधुनिकीकरण की उपेक्षा हुई और निजी मिलों के विपरीत इथेनॉल व सह-उत्पादन जैसी लाभदायक सहायक इकाइयों को लागू करने में विफलता मिली.
- •किसानों को गन्ने के बकाया का भुगतान नहीं हो रहा है, और श्रमिक अवैतनिक मजदूरी से पीड़ित हैं, 2018 तक वित्तीय कठिनाई के कारण 36 मौतें दर्ज की गईं, जबकि मिलों की संपत्ति नीलाम की जा रही है.
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