जहां पर वो पत्थरों को तराशते हैं वहीं पर वो एक ठेला भी लगाते हैं. 
गया
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News1801-02-2026, 11:07

बोधगया के 'शिल्पकार' विजय: सड़क किनारे तराशते हैं पत्थर, विदेशों तक है मूर्तियों की मांग.

  • बोधगया के 38 वर्षीय मूर्तिकार विजय कुमार अपनी पत्थर और लकड़ी की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं.
  • उन्होंने यह कला अपने पिता बिरजू लाल चौधरी से सीखी है, और अब उनकी मूर्तियों की भारत और विदेशों में बहुत मांग है.
  • विजय महाबोधि मंदिर के पास सड़क किनारे ठेले पर मूर्तियां तराशते हैं, जिनमें भगवान बुद्ध, मंदिर के देवी-देवता और महान हस्तियों की मूर्तियां शामिल हैं.
  • उनके संग्रह में एक इंच से भी छोटी से लेकर 20 फीट तक की पत्थर की मूर्तियां और 7 फीट तक की लकड़ी की मूर्तियां शामिल हैं, कस्टम आकार भी उपलब्ध हैं.
  • विनम्र शुरुआत और ठेले पर काम करने के बावजूद, विजय प्रतिमाह 2 लाख रुपये तक की बिक्री के साथ महत्वपूर्ण कमाई करते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बोधगया के सड़क किनारे मूर्तिकार विजय कुमार ने अपनी उत्कृष्ट पत्थर की नक्काशी के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है.

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