प्रवासी पक्षियों का शिकार: स्वास्थ्य जोखिम, कानूनी सजा और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम

जमुई
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News18•26-01-2026, 11:10
प्रवासी पक्षियों का शिकार: स्वास्थ्य जोखिम, कानूनी सजा और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
- •नागी पक्षी अभयारण्य, झाझा, जमुई में प्रवासी पक्षियों का शिकार किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और कानूनी परिणाम हो सकते हैं.
- •पक्षी विज्ञानी संदीप कुमार ने चेतावनी दी है कि प्रवासी पक्षियों का मांस खाना अवैध है और इससे बर्ड फ्लू, एवियन इन्फ्लूएंजा और साल्मोनेला जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल सकती हैं.
- •पक्षी अपनी लंबी यात्रा के दौरान खतरनाक वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी, भारी धातु और रसायन जमा करते हैं, जिससे उनका मांस असुरक्षित हो जाता है.
- •इनका सेवन करने से तेज बुखार, श्वसन संबंधी समस्याएँ, फेफड़ों में संक्रमण, पेट की गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं और कुछ मामलों में यह घातक भी हो सकता है, खासकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए.
- •वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत, संरक्षित पक्षियों का शिकार या सेवन करने पर 3-7 साल की जेल और 25,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: प्रवासी पक्षियों का शिकार करना अवैध है, गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है और इसके लिए जेल व भारी जुर्माना हो सकता है.
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