सीतामढ़ी: आजादी के बाद भी नहीं बना पुल, हजारों लोग जान जोखिम में डालकर करते हैं नदी पार.

सीतामढ़ी
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News18•01-01-2026, 23:34
सीतामढ़ी: आजादी के बाद भी नहीं बना पुल, हजारों लोग जान जोखिम में डालकर करते हैं नदी पार.
- •सीतामढ़ी के रामपट्टी-गंगापट्टी घाट पर बुढ़नद नदी पर आजादी के 76 साल बाद भी स्थायी पुल नहीं बना, हजारों लोग खतरनाक बांस के पुल पर निर्भर हैं.
- •रामखेतरी, बाजितपुर सहित आठ गांवों के 40,000 से अधिक निवासी स्कूल, अस्पताल और बाजार के लिए रोजाना इस जर्जर पुल का उपयोग करते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा रहता है.
- •स्थानीय लोग कमजोर बांस के पुल को पार करने को 'मौत से खेलना' बताते हैं, क्योंकि अक्सर पैर फिसलते हैं, लकड़ी टूटती है और महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग घायल होते हैं.
- •मानसून में अस्थायी पुल बह जाता है, जिससे गांव कट जाते हैं और 10-12 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है, आपातकालीन सेवाओं और शिक्षा पर गंभीर असर पड़ता है.
- •बार-बार अपील के बावजूद, सरकार और जनप्रतिनिधियों ने स्थायी समाधान नहीं दिया, जिससे ग्रामीण हताश हैं और एक स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सीतामढ़ी के ग्रामीण 76 साल से अस्थायी पुल पर जान जोखिम में डाल रहे हैं, स्थायी समाधान का इंतजार है.
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