
त्वरित औद्योगिक उत्पादन वृद्धि मुद्रा अवमूल्यन, मुक्त व्यापार समझौतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव से प्रेरित हो सकती है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ, विशेष रूप से पश्चिम एशिया संघर्ष, उच्च ऊर्जा कीमतों, आपूर्ति में व्यवधान और संभावित जीडीपी वृद्धि में नरमी के माध्यम से भारत की औद्योगिक रिकवरी को प्रभावित कर सकता है{{7}
उपलब्ध जानकारी के आधार पर, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं और बड़े पैमाने पर खपत में कमजोरी को दूर करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेपों के विवरण वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं।