Outbound M&A deals jump in 2025
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Moneycontrol26-12-2025, 12:51

भारतीय कंपनियों का विदेशी अधिग्रहण 2026 तक जारी रहेगा, मजबूत बैलेंस शीट से प्रेरित.

  • भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी विलय और अधिग्रहण (M&A) की गतिविधि 2026 तक मजबूत रहने की उम्मीद है, जो 2025 में $16.84 बिलियन तक पहुंच गई, जो एक दशक में सबसे अधिक है.
  • यह वृद्धि मजबूत बैलेंस शीट, परिष्कृत वित्तपोषण विकल्पों और वैश्विक विस्तार, प्रौद्योगिकी पहुंच व बाजार प्रवेश की रणनीतिक आवश्यकता से प्रेरित है.
  • लेन-देन में अच्छी तरह से संरचित मध्य-बाजार सौदों की ओर झुकाव की संभावना है, जबकि बड़े सौदे मूल्यांकन, भू-राजनीति और मुद्रा आंदोलनों के प्रति संवेदनशील रहेंगे.
  • आईपी, अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं, स्थापित ब्रांडों का अधिग्रहण और आपूर्ति श्रृंखला जोखिम को कम करना प्रमुख चालक हैं; ऑटोमोटिव, प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्र सक्रिय हैं.
  • भू-राजनीतिक कारक, व्यापार संबंध और मुद्रा स्थिरता सौदों के प्रवाह और निष्पादन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं, जैसा कि सोनिया दासगुप्ता और प्रीत सिंह ने बताया.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारतीय कंपनियों का विदेशी M&A वित्तीय ताकत और वैश्विक महत्वाकांक्षा के कारण लगातार बढ़ेगा.

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