2026 तक निजी पूंजीगत व्यय भारत की वृद्धि का नेतृत्व करेगा, सार्वजनिक खर्च चरम पर.

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Moneycontrol•23-12-2025, 18:53
2026 तक निजी पूंजीगत व्यय भारत की वृद्धि का नेतृत्व करेगा, सार्वजनिक खर्च चरम पर.
- •भारत का पूंजीगत व्यय 2026 तक सार्वजनिक-नेतृत्व से निजी-नेतृत्व में बदलने वाला है, क्योंकि सरकारी खर्च अपने चरम पर पहुंच गया है.
- •कई वर्षों से स्थिर रहा निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय अब नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य और डेटा सेंटर जैसे नए युग के क्षेत्रों पर केंद्रित होगा.
- •प्रमुख विकास क्षेत्रों में डेटा सेंटर (2035 तक 1.5 GW से 14 GW), ड्रोन उत्पादन (2025 तक $4.2 बिलियन, 'ड्रोन शक्ति' प्रोत्साहन के साथ), और रक्षा विनिर्माण (2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये उत्पादन का लक्ष्य) शामिल हैं.
- •अर्थशास्त्री अनिता रंगन और डीके श्रीवास्तव निजी पूंजीगत व्यय का समर्थन करने वाले कारकों पर प्रकाश डालते हैं, जिनमें एफडीआई, कम कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक आपूर्ति में आसानी और मुक्त व्यापार समझौते शामिल हैं.
- •जबकि FY26 की पहली छमाही में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी गई थी, निजी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें सूचीबद्ध कंपनियों का पूंजीगत व्यय FY26 में 8 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 2026 से भारत की आर्थिक वृद्धि निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय पर अधिक निर्भर करेगी.
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