
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरबीआई द्वारा इस साल के अंत में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आरबीआई रेपो दर को 5.25% पर बनाए रखेगा।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का अनुमान है, जिससे आय के पूर्वानुमान कम होंगे, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि में संभावित रूप से 1% की कमी आएगी और मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
मजबूत निवेश के अवसर प्रदान करने वाले क्षेत्रों में बैंकिंग, वित्त, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा, फार्मा, ऊर्जा और विमानन शामिल हैं।