डायरेक्ट या रेगुलर म्यूचुअल फंड: लागत नहीं, व्यवहार तय करेगा आपका चुनाव.

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Moneycontrol•15-12-2025, 13:29
डायरेक्ट या रेगुलर म्यूचुअल फंड: लागत नहीं, व्यवहार तय करेगा आपका चुनाव.
- •डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में मुख्य अंतर पहुंच का तरीका है; डायरेक्ट फंड सीधे खरीदे जाते हैं, जबकि रेगुलर फंड में वितरक का कमीशन शामिल होता है.
- •डायरेक्ट फंड कम लागत के कारण लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देते हैं, लेकिन निवेशक का व्यवहार लागत बचत से अधिक महत्वपूर्ण है.
- •अनुशासित और आत्मविश्वासी निवेशक, जो अपने निर्णय स्वयं ले सकते हैं और योजना पर टिके रह सकते हैं, उनके लिए डायरेक्ट फंड बेहतर होते हैं.
- •जिन निवेशकों को मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है या जो बाजार के उतार-चढ़ाव में भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं, उनके लिए रेगुलर फंड के माध्यम से एक अच्छा सलाहकार फायदेमंद हो सकता है.
- •सही विकल्प आपकी अनुशासन क्षमता और मार्गदर्शन की आवश्यकता पर निर्भर करता है, न कि केवल लागत पर, ताकि आप अपने निवेश लक्ष्यों के प्रति लगातार बने रहें.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यह लेख बताता है कि म्यूचुअल फंड का चुनाव लागत से ज़्यादा आपके व्यवहार पर निर्भर करता है.
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