भारतीय व्यवसायों में विरासत योजना: अब सिर्फ उत्तराधिकार से बढ़कर रणनीतिक शासन.

पर्सनल फाइनेंस
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Moneycontrol•01-01-2026, 14:14
भारतीय व्यवसायों में विरासत योजना: अब सिर्फ उत्तराधिकार से बढ़कर रणनीतिक शासन.
- •भारतीय व्यवसायों में विरासत योजना अब केवल परिवार तक सीमित न होकर शासन, पूंजी जुटाने और नियंत्रण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक निर्णय बन गई है.
- •कंपनियों के बढ़ने और निवेश आकर्षित करने पर अस्पष्ट उत्तराधिकार संरचनाएं वाणिज्यिक जोखिम पैदा करती हैं, जिससे विवाद और कर अक्षमताएं होती हैं.
- •आधुनिक विरासत योजना में औपचारिक शासन, प्रारंभिक पुनर्गठन और भूमिकाओं, निकास तथा उत्तराधिकार पर कठिन बातचीत शामिल है, जो सेवानिवृत्ति से बहुत पहले शुरू होती है.
- •प्राइवेट इक्विटी निवेश ने उत्तराधिकार की चर्चाओं को तेज कर दिया है, जिसमें निवेशकों को नेतृत्व और अगली पीढ़ी की क्षमताओं पर स्पष्टता चाहिए होती है.
- •खंडित संपत्ति संरचनाएं और योजना में देरी से कर और स्टाम्प शुल्क लागत बढ़ती है, इसलिए नियमित समीक्षा और पेशेवर सलाह आवश्यक है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत में विरासत योजना अब व्यवसाय की निरंतरता और विकास के लिए एक गतिशील, रणनीतिक आवश्यकता है.
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