
भारत का आवासीय बाज़ार नई आपूर्ति में कमी [3][5] और वैश्विक संघर्षों से बढ़ती निर्माण लागत [2][7] के कारण समेकित हो रहा है।
नए घरों की लॉन्चिंग में गिरावट से बाजार के समेकन का दौर शुरू होने की उम्मीद है और सामर्थ्य संबंधी दबावों तथा संपत्ति की बढ़ी हुई कीमतों के कारण यह खरीदारों की धारणा पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
टियर 2 शहर बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर से परे रियल एस्टेट रिकवरी की संभावना दिखाते हैं[1]।