JNU में प्रधानमंत्रियों का विरोध: इंदिरा से मोदी तक, विरोध की लंबी विरासत.

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News18•07-01-2026, 14:58
JNU में प्रधानमंत्रियों का विरोध: इंदिरा से मोदी तक, विरोध की लंबी विरासत.
- •JNU में प्रधानमंत्रियों और सरकारी नीतियों के खिलाफ छात्र विरोध का लंबा इतिहास रहा है, जिसकी शुरुआत 1975 में इंदिरा गांधी के आपातकाल से हुई थी.
- •छात्रों ने इंदिरा गांधी के आपातकाल का विरोध किया, जिससे गिरफ्तारियां हुईं और तीन दिवसीय हड़ताल हुई, जिसने JNU की सत्तारूढ़ दलों को चुनौती देने की छवि स्थापित की.
- •2005 में मनमोहन सिंह को मूर्ति अनावरण के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा, जिसमें वामपंथी समूहों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया.
- •2016 से बड़ी विवाद उठे, जिसमें अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ विरोध, कथित राष्ट्रविरोधी नारे, कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य पर देशद्रोह के आरोप शामिल थे.
- •हाल की घटनाओं (जनवरी 2026) में छात्रों ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए, जिससे JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज हुई और राष्ट्रीय बहस छिड़ गई.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: JNU छात्र सक्रियता की एक विवादास्पद विरासत बनाए हुए है, जो लगातार सरकारी नीतियों और प्रधानमंत्रियों को चुनौती देती है.
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