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मां-पिता को खोने वाले दो मासूमों के लिए फरिश्ता बनी अनोखी सोच संस्था, कहानी कर देगी भावुक.
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'अनोखी सोच' बनी अनाथ बच्चों का सहारा, मां का किया अंतिम संस्कार.
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News18
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10-03-2026, 14:48
'अनोखी सोच' बनी अनाथ बच्चों का सहारा, मां का किया अंतिम संस्कार.
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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में 'अनोखी सोच' संस्था ने यशोदा गुप्ता का अंतिम संस्कार किया, जिनके पति पहले ही गुजर चुके थे और दो छोटे बच्चे हैं.
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संस्था 2018 में पंजीकृत हुई और COVID-19 महामारी के दौरान 52 शवों का अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की, जब लोग छूने से भी डरते थे.
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'अनोखी सोच' के सदस्य अपनी जेब से पैसे खर्च कर बेसहारा लोगों की मदद करते हैं, जिसमें राशन, वित्तीय सहायता और अन्य सामाजिक कार्य शामिल हैं.
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संस्था अस्पतालों में पोस्टर लगाकर जरूरतमंदों तक पहुंचती है और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी, स्वच्छता अभियान जैसे कई कार्य करती है.
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सूर्य प्रकाश साहू अध्यक्ष हैं और मनोज कुमार सदस्य हैं; संस्था सभी समुदायों के लोगों की मदद करती है और अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है.
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