अक्षरधाम में 'विश्व शांति महायज्ञ' का आयोजन: श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम, श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी
अक्षरधाम में 'विश्व शांति महायज्ञ': श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्म का अनोखा संगम.
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News18•26-03-2026, 11:45
अक्षरधाम में 'विश्व शांति महायज्ञ': श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्म का अनोखा संगम.
•दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में 26 मार्च को 'विश्व शांति महायज्ञ' और 108 फुट ऊंची तपोमूर्ति श्री नीलकंठ वर्णी की प्राण-प्रतिष्ठा हुई.
•हजारों श्रद्धालुओं और महंत स्वामी महाराज की उपस्थिति में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मील का पत्थर बना.
•नीलकंठ वर्णी की 108 फुट ऊंची 'पंचधातु' से बनी मूर्ति, जिसमें उन्हें एक पैर पर तपस्वी मुद्रा में दर्शाया गया है, दुनिया की पहली ऐसी मूर्ति है और इसे बनने में एक साल लगा.
•भगवान स्वामीनारायण के बाल रूप नीलकंठ वर्णी ने 11 साल की उम्र में मानव कल्याण के लिए 12,000 किलोमीटर की यात्रा की थी, जो त्याग और सेवा का प्रतीक है.
•300 से अधिक संतों ने, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागी भी शामिल थे, महायज्ञ किया और विश्व शांति, एकता और सद्भाव के लिए प्रार्थना की, शांति के संदेश के रूप में सफेद कबूतर छोड़े गए.