रात में जानवरों का रोना: अंधविश्वास या हकीकत? जानें इस्लामी नजरिया.

धर्म
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News18•21-12-2025, 08:42
रात में जानवरों का रोना: अंधविश्वास या हकीकत? जानें इस्लामी नजरिया.
- •रात में कुत्तों या बिल्लियों के रोने को अक्सर अपशकुन, बीमारी या दुर्भाग्य से जोड़ा जाता है.
- •मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने स्पष्ट किया कि इस्लाम इन अंधविश्वासों का समर्थन नहीं करता है.
- •जानवर अदृश्य चीजों को महसूस कर सकते हैं, जिससे वे आवाजें निकालते हैं, लेकिन यह कोई अपशकुन नहीं है.
- •इस्लाम के अनुसार, दुर्भाग्य अल्लाह की इच्छा से होता है, न कि जानवरों की आवाजों से; ऐसे विचार अनावश्यक भय पैदा करते हैं.
- •मुसलमानों को शांति और सुरक्षा के लिए अल्लाह पर भरोसा रखने और विशेष प्रार्थनाएं पढ़ने की सलाह दी जाती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रात में जानवरों का रोना अपशकुन नहीं; इस्लाम अंधविश्वासों को खारिज करता है, अल्लाह पर भरोसा रखें.
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