बैद्यनाथ मंदिर की बसंत पंचमी पर अनोखी परंपरा: त्रेता युग से बाबा का तिलकोत्सव
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News1821-01-2026, 10:27

बैद्यनाथ मंदिर की बसंत पंचमी पर अनोखी परंपरा: त्रेता युग से बाबा का तिलकोत्सव

  • बसंत पंचमी, जो इस बार 23 जनवरी को है, देवी सरस्वती के प्रकटोत्सव के रूप में मनाई जाती है और देशभर में उनकी पूजा होती है.
  • झारखंड के देवघर में, बैद्यनाथ मंदिर में बसंत पंचमी पर बाबा का तिलकोत्सव मनाया जाता है, यह परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है.
  • यह तिलकोत्सव भगवान शिव के विवाह का पहला अनुष्ठान है, जिसमें मिथिलांचल के लोग देवी पार्वती के पक्ष से भेंट लेकर आते हैं.
  • विशेष चढ़ावे में बेलपत्र, फूल, तिल, मिठाई, धान की बालियां, लड्डू, घी और लाल गुलाल शामिल हैं.
  • बैद्यनाथ मंदिर, एक ज्योतिर्लिंग और 'मनोकामना शिवलिंग' है, जिसे सती के हृदय गिरने के कारण देवी पार्वती और भगवान शिव का मिलन स्थल भी माना जाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बैद्यनाथ मंदिर में बसंत पंचमी पर त्रेता युग से चली आ रही भगवान शिव के तिलकोत्सव की अनूठी परंपरा निभाई जाती है.

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