पहाड़ों में शुभ कार्यों के लिए अनिवार्य 'बर्मा': जानें 108 तिनकों से बने इस पवित्र आसन का रहस्य.

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News18•31-01-2026, 18:49
पहाड़ों में शुभ कार्यों के लिए अनिवार्य 'बर्मा': जानें 108 तिनकों से बने इस पवित्र आसन का रहस्य.
- •पहाड़ों में बर्मा, जो 108 कुश के तिनकों से बनता है, सभी पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के लिए अनिवार्य है, यह जीवन शैली का प्रतीक है.
- •हिंदू धर्मग्रंथों में कुश घास को सबसे पवित्र माना जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करती है, इसलिए यह पूजा और श्राद्ध में महत्वपूर्ण है.
- •108 की संख्या का हिंदू धर्म में आध्यात्मिक महत्व है, यही कारण है कि बर्मा बनाने में मंत्रों के साथ कुश के 108 तिनकों का उपयोग किया जाता है.
- •पंडित बलदेव दत्त भट्ट बताते हैं कि बर्मा 'देवताओं का आसन' है, जिसके माध्यम से पूजा के दौरान देवताओं का आह्वान किया जाता है और उन्हें स्थान दिया जाता है.
- •छोटे पूजा से लेकर बड़े हवन और विवाह तक, सभी शुभ समारोहों में बर्मा अनिवार्य है, और इसे आस्था के प्रतीक के रूप में पहाड़ी घरों में सहेज कर रखा जाता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बर्मा, 108 कुश के तिनकों से बना पवित्र आसन, पहाड़ी अनुष्ठानों और पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
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