भगवान का बजट सत्र: मालमास में होता है कर्मों का हिसाब, विष्णु के हाथ में डोर.

धर्म
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News18•18-12-2025, 18:17
भगवान का बजट सत्र: मालमास में होता है कर्मों का हिसाब, विष्णु के हाथ में डोर.
- •मालमास (पुरुषोत्तम मास) को "भगवान का बजट सत्र" माना जाता है, यह मानव कर्मों का हिसाब रखने का 30 दिवसीय वार्षिक काल है.
- •भगवान विष्णु इस आध्यात्मिक "वित्तीय प्रणाली" की देखरेख करते हैं, जहाँ सभी देवता कर्मों के मूल्यांकन में भाग लेते हैं.
- •मालमास के दौरान दान, जप और पुण्य कर्म करने से कई गुना अधिक सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.
- •भक्ति के साथ प्रतिदिन ₹1 का दान भी भगवान के बैंक में खाता खोल सकता है, जिससे शुभ परिवर्तन आते हैं.
- •निंदा, क्रोध और अहंकार जैसे दुर्गुणों को त्यागना और तपस्या व सेवा में संलग्न होना भविष्य के जीवन को निर्धारित करता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मालमास भगवान का बजट सत्र है जहाँ पुण्य कर्म और भक्ति भविष्य के आशीर्वाद तय करते हैं.
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